कान से पस या पानी आना
क्या यह साधारण है या ख़तरनाक संकेत?
कान बहना सामान्य नहीं, गंभीर समस्या है।
Satkriti Hospital – ENT विशेषज्ञ द्वारा तैयार सुरक्षित गाइड
समस्या की पहचान – कान बहना क्यों गंभीर है?
भारत में लाखों लोग बार-बार कान बहने (Ear Discharge) को सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
लेकिन यही समस्या आगे चलकर स्थायी सुनने की कमी, कान के पर्दे में छेद, और मस्तिष्क संक्रमण तक का कारण बन सकती है।
इसलिए, इन चेतावनी संकेतों को अनदेखा करना ख़तरनाक हो सकता है।
कान से पस आने के 5 चेतावनी संकेत
बार-बार कान बहना
2–3 बार से ज़्यादा पस निकले तो पुरानी बीमारी का संकेत।
बदबूदार पस
कान के पर्दे के फटने या अंदर गंभीर संक्रमण का संकेत।
सुनने की क्षमता कम होना
कान बहने के साथ सुनाई कम होना चिंता का विषय है।
बच्चों में बार-बार कान बहना
बोलने, सीखने और पढ़ाई पर बुरा असर डालता है।
सिरदर्द / चक्कर आना
संक्रमण दिमाग़ तक फैलने का खतरा।
कान बहने के कारण
- बार-बार सर्दी-जुकाम या नाक बंद रहना – संक्रमण कान तक पहुँचता है।
- कान में चोट या खुरचना – कॉटन बड, तीली, हेयर पिन का उपयोग।
- कान का पर्दा फटना – चोट, दबाव या पुराना संक्रमण।
- कान में पानी या गंदगी – नदी, तालाब या नहाते समय।
- बच्चों में बार-बार कान बहना – सुनने और बोलने की क्षमता पर असर।
क्या करें और क्या न करें
✓ Do’s – क्या करें
- तुरंत ENT डॉक्टर से जाँच करवाएँ।
- कान हमेशा सूखा रखें।
- डॉक्टर की दवा और ड्रॉप्स का पूरा कोर्स करें।
- बच्चों के कान बहने को गंभीरता से लें।
- पस, खून, बदबू या चक्कर आए तो तुरंत अस्पताल जाएँ।
✗ Don’ts – क्या न करें
- कॉटन बड, तीली, हेयर पिन, तेल या लहसुन का रस कान में न डालें।
- डॉक्टर की सलाह बिना दवा/ड्रॉप्स बार-बार न बदलें।
- “अपने आप ठीक हो जाएगा” सोचकर देरी न करें।
- गंदे पानी में नहाते समय कान में पानी जाने से बचें।
ENT विशेषज्ञ की सलाह
जाँच ही बचाव है
Audiometry और Ear Endoscopy से कारण जल्दी पता लगाया जा सकता है।
बच्चों को नज़रअंदाज़ न करें
बार-बार कान बहना उनकी सुनने और बोलने की क्षमता रोक सकता है।
पुरानी बीमारी पर ध्यान दें
Chronic Ear Disease का समय पर इलाज न हो तो सर्जरी ज़रूरी हो सकती है।
सरकारी योजनाओं का लाभ उठाएँ
Ayushman Bharat और ADIP योजना से कम लागत / मुफ्त में कान की सर्जरी उपलब्ध है।
सुरक्षित घरेलू सावधानियाँ
घरेलू उपाय इलाज नहीं हैं — सिर्फ अस्थायी राहत देते हैं।
- नहाते समय वैसलीन लगी रुई से कान को ढकें ताकि पानी अंदर न जाए।
- कान के बाहरी हिस्से को हल्के से साफ करें, अंदर कुछ न डालें।
- दर्द या पस होने पर गुनगुने कपड़े से हल्की सिंकाई करें।
- बच्चे का कान बह रहा हो तो तुरंत ENT विशेषज्ञ से दिखाएँ।
Satkriti Hospital का वादा
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