वाराणसी में 27 सितंबर को निःशुल्क मेगा ENT, कॉक्लियर इंप्लांट एवं डायबिटीज कैंप
September 22, 2026

वाराणसी में निःशुल्क ENT कैंप की तलाश कर रहे परिवारों के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है। सत्कृति हॉस्पिटल, लंका द्वारा रविवार, 27 सितंबर 2026 को एक निःशुल्क मेगा ENT, कॉक्लियर इंप्लांट एवं डायबिटीज जाँच शिविर आयोजित किया जा रहा है। शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चलेगा और इसमें कान, नाक, गले की जाँच, सुनने की क्षमता का परीक्षण, कॉक्लियर इंप्लांट स्क्रीनिंग तथा रक्त शर्करा की जाँच शामिल है।
यह तारीख संयोग से नहीं चुनी गई है। सितंबर माह का अंतिम रविवार पूरी दुनिया में विश्व बधिर दिवस के रूप में मनाया जाता है, और यह अंतरराष्ट्रीय बधिर सप्ताह का समापन दिवस भी होता है। इस लेख में शिविर से जुड़ी हर जरूरी बात दी गई है, कौन सी जाँच निःशुल्क हैं, किन लोगों को आना चाहिए, ADIP योजना के अंतर्गत बच्चों को क्या लाभ मिल सकता है, और पंजीकरण की प्रक्रिया क्या है।
शिविर का विवरण एक नजर में
- तारीख: रविवार, 27 सितंबर 2026
- समय: सुबह 10:00 बजे से दोपहर 2:00 बजे तक
- स्थान: सत्कृति हॉस्पिटल, बी 32/28 बी-19, संकट मोचन, लंका, वाराणसी 221005
- शुल्क: पूर्णतः निःशुल्क, कोई पंजीकरण शुल्क नहीं
- पंजीकरण: 8765848001 या 9454219800
शिविर केवल चार घंटे का है और जाँच कराने वालों की संख्या सीमित रखी जाएगी, इसलिए पहले से पंजीकरण कराना बेहतर रहेगा। पंजीकृत लोगों को समय बताकर बुलाया जाएगा, जिससे प्रतीक्षा कम हो।
विश्व बधिर दिवस पर ही यह शिविर क्यों
भारत में सुनने से जुड़ी समस्याओं को लेकर सबसे बड़ी दिक्कत देर से पहचान की है। बच्चों में सुनने की कमी अक्सर तब पकड़ में आती है जब बोलने और स्कूल शुरू करने का महत्वपूर्ण समय निकल चुका होता है। माता पिता को लगता है कि बच्चा शर्मीला है या देर से बोलेगा, जबकि असल कारण सुनाई कम देना होता है।
यही बात वयस्कों पर भी लागू होती है। कान से पानी आना या हल्का कम सुनाई देना वर्षों तक नजरअंदाज किया जाता है, और जब तक मरीज डॉक्टर तक पहुँचता है, बीच के कान की छोटी हड्डियाँ संक्रमण से प्रभावित हो चुकी होती हैं। समय पर जाँच से यह नुकसान लगभग पूरी तरह रोका जा सकता है, और इसी सोच के साथ यह शिविर विश्व बधिर दिवस पर रखा गया है।
शिविर में कौन कौन सी जाँच निःशुल्क होंगी
1. कान, नाक और गले की जाँच
ENT विशेषज्ञ द्वारा परामर्श और कान की जाँच शिविर का आधार है। इसमें ओटोस्कोप से कान के पर्दे की स्थिति देखी जाती है, नाक की बंदी और साइनस से जुड़ी शिकायतों का परीक्षण होता है, तथा गले और टॉन्सिल की जाँच की जाती है। यदि किसी मरीज में पर्दे में छेद, लगातार स्राव या टॉन्सिल की बार बार होने वाली समस्या मिलती है, तो उसे आगे की जाँच के लिए चिन्हित किया जाता है।
2. सुनने की जाँच और कॉक्लियर इंप्लांट स्क्रीनिंग
सुनने की क्षमता की जाँच प्योर टोन ऑडियोमेट्री (PTA) से की जाती है। जरूरत पड़ने पर इम्पीडेंस ऑडियोमेट्री, OAE और BERA जैसी जाँचें भी उपलब्ध हैं। छोटे बच्चे जो जाँच के दौरान प्रतिक्रिया नहीं दे पाते, उनके लिए OAE और BERA विशेष रूप से उपयोगी होती हैं, क्योंकि इनमें बच्चे के सहयोग की आवश्यकता नहीं होती।
जिन बच्चों में गंभीर स्तर की सुनने की कमी पाई जाती है, उनके अभिभावकों को कॉक्लियर इंप्लांट और ADIP योजना की प्रक्रिया समझाई जाती है।
3. शुगर (मधुमेह) की जाँच
शिविर का दूसरा हिस्सा मधुमेह से जुड़ा है। इसमें रक्त शर्करा की जाँच, रक्तचाप और वजन का परीक्षण तथा आहार एवं दवा संबंधी परामर्श शामिल है। मधुमेह और कान के संक्रमण का सीधा संबंध है, अनियंत्रित शुगर वाले मरीजों में कान का संक्रमण अधिक गंभीर रूप ले सकता है और देर से ठीक होता है, इसलिए दोनों जाँचें एक ही दिन रखी गई हैं।
इस शिविर में किन लोगों को जरूर आना चाहिए
यदि आप या आपके परिवार में किसी को नीचे दी गई शिकायतों में से कोई है, तो यह शिविर आपके लिए है:
- कान से पानी या मवाद आना, या कान से दुर्गंधयुक्त स्राव
- कान में दर्द, खुजली या लगातार भारीपन
- सुनाई कम देना या कान में लगातार सीटी और घंटी जैसी आवाज
- बच्चे का देर से बोलना शुरू करना या नाम पुकारने पर ध्यान न देना
- नाक लगातार बंद रहना, बार बार छींक आना या साइनस की शिकायत
- गले में खराश या आवाज तीन सप्ताह से अधिक समय से बैठी रहना
- खर्राटे आना और पूरी नींद के बाद भी दिनभर थकान रहना
- चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना
- बार बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना या बिना कारण वजन घटना
- घाव देर से भरना या पैरों में झुनझुनी रहना
इनमें से कई शिकायतें शुरुआत में मामूली लगती हैं। कान से पानी आना इसका सबसे आम उदाहरण है, जिसे अधिकांश लोग घरेलू नुस्खों से ठीक करने की कोशिश करते हैं। कान में तेल, पानी या कोई घरेलू घोल डालना नुकसानदेह हो सकता है, खासकर तब जब कान के पर्दे में छेद हो। कान बहने के कारण और इलाज के बारे में विस्तार से पढ़कर आप समझ सकते हैं कि यह समस्या कब गंभीर होती है।
ADIP योजना क्या है और बच्चों के लिए यह क्यों महत्वपूर्ण है
ADIP भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की योजना है, जिसके अंतर्गत गंभीर से अति गंभीर स्तर की सुनने की कमी वाले बच्चों को कॉक्लियर इंप्लांट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बनाई गई है, जिनके लिए इंप्लांट का खर्च स्वयं उठाना संभव नहीं होता।
कॉक्लियर इंप्लांट क्या है? यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है जो सर्जरी द्वारा कान के भीतर लगाया जाता है। जहाँ सामान्य हियरिंग एड आवाज को तेज करके भेजती है, वहीं कॉक्लियर इंप्लांट क्षतिग्रस्त भीतरी कान को बायपास करते हुए सीधे सुनने की नस तक संकेत पहुँचाता है। इसीलिए यह उन मामलों में काम आता है जहाँ हियरिंग एड से लाभ नहीं होता।
इंप्लांट का निर्णय एक ही दिन में नहीं होता। पहले सुनने की कमी का स्तर जाँचों से तय किया जाता है, फिर पात्रता देखी जाती है, और उसके बाद सर्जरी तथा बाद की स्पीच थेरेपी की योजना बनती है। शिविर इस प्रक्रिया का पहला चरण है, जहाँ यह पता चलता है कि बच्चे को आगे की जाँच की आवश्यकता है या नहीं। सुनने की कमी से जुड़ी पूरी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध है।
जिन मरीजों में सुनने की कमी हल्की या मध्यम होती है, उनके लिए इंप्लांट की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे मामलों में हियरिंग एड से ही अच्छा परिणाम मिल जाता है, और शिविर में इसकी जानकारी भी दी जाएगी।
आयुष्मान भारत के अंतर्गत आगे का इलाज
शिविर में यदि किसी मरीज को सर्जरी की आवश्यकता पाई जाती है, तो पात्र परिवारों के लिए आयुष्मान भारत (PM-JAY) के अंतर्गत कैशलेस उपचार का विकल्प उपलब्ध है। सत्कृति हॉस्पिटल इस योजना के अंतर्गत ENT उपचार के लिए सूचीबद्ध है, जिसमें कान की सर्जरी, नाक एवं साइनस की सर्जरी, गले की सर्जरी तथा टॉन्सिल से जुड़ी प्रक्रियाएँ शामिल हैं।
शिविर के दिन आयुष्मान डेस्क पर पात्रता की जाँच कराई जा सकती है। इसके लिए आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड साथ लाना आवश्यक है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत मिलने वाली सुविधाओं की विस्तृत जानकारी वेबसाइट पर दी गई है।
शिविर में क्या साथ लाएँ और पंजीकरण कैसे करें
पंजीकरण के लिए 8765848001 या 9454219800 पर कॉल किया जा सकता है। पंजीकरण के समय नाम, मोबाइल नंबर और यह बताना होगा कि जाँच ENT की करानी है, शुगर की, या दोनों की।
शिविर के दिन ये दस्तावेज और चीजें साथ लाएँ:
- आधार कार्ड
- आयुष्मान कार्ड, यदि उपलब्ध हो
- पहले की कोई जाँच रिपोर्ट या ऑडियोमेट्री रिपोर्ट
- वर्तमान में चल रही दवाओं की सूची या पर्चा
- शुगर की जाँच के लिए आने वाले लोग खाली पेट आएँ तो बेहतर रहेगा
बच्चों की जाँच कराने आ रहे अभिभावक यह ध्यान रखें कि जाँच के समय बच्चा शांत और आरामदायक स्थिति में हो, इससे सुनने की जाँच के परिणाम अधिक सटीक आते हैं।
सत्कृति हॉस्पिटल के बारे में
सत्कृति हॉस्पिटल की स्थापना वर्ष 2012 में डॉ. मनोज कुमार गुप्ता द्वारा की गई थी। यह पूर्वांचल का समर्पित ENT एवं कॉक्लियर इंप्लांट अस्पताल है और NABH से मान्यता प्राप्त है। NABH भारत सरकार द्वारा स्थापित वह संस्था है जो अस्पतालों को रोगी सुरक्षा और गुणवत्ता के छह सौ से अधिक मानकों पर परखती है।
अस्पताल में ENT से जुड़ी लगभग सभी सेवाएँ एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं, जिनमें कान का इलाज, नाक एवं साइनस का इलाज, गले का इलाज, चक्कर (वर्टिगो) का प्रबंधन तथा ऑडियोलॉजी एवं एंडोस्कोपी सेवाएँ शामिल हैं। मधुमेह के मरीजों के लिए अलग से डायबिटीज देखभाल विभाग संचालित है।
शिविर में अस्पताल के ENT विशेषज्ञ उपलब्ध रहेंगे, जिनमें डॉ. मनोज कुमार गुप्ता, डॉ. अभिनीत जैन और डॉ. अंकित ओझा शामिल हैं। अस्पताल समय समय पर वाराणसी और आसपास के जिलों में निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित करता रहा है, और यह आयोजन उसी क्रम का हिस्सा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या शिविर में सचमुच कोई शुल्क नहीं लगेगा?
शिविर में परामर्श और जाँच निःशुल्क हैं। यदि जाँच के बाद किसी मरीज को आगे इलाज या सर्जरी की आवश्यकता होती है, तो उसकी जानकारी अलग से दी जाएगी, और पात्र परिवारों के लिए आयुष्मान भारत के अंतर्गत कैशलेस विकल्प उपलब्ध रहेगा।
क्या पंजीकरण कराना जरूरी है या सीधे पहुँच सकते हैं?
सीधे आना भी संभव है, लेकिन शिविर केवल चार घंटे का है। पहले से पंजीकरण कराने पर आपको समय बताकर बुलाया जाएगा और प्रतीक्षा कम होगी।
बच्चे की सुनने की जाँच किस उम्र में करानी चाहिए?
जितनी जल्दी हो सके। यदि बच्चा तेज आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देता, नाम पुकारने पर नहीं देखता, या उसकी उम्र के हिसाब से बोलना शुरू नहीं हुआ है, तो जाँच में देर नहीं करनी चाहिए। OAE और BERA जैसी जाँचें बहुत छोटे बच्चों में भी की जा सकती हैं।
कान बहने पर क्या घरेलू उपाय किए जा सकते हैं?
कान में तेल, पानी, माँ का दूध या कोई देसी घोल डालना नहीं चाहिए। बहते कान का अर्थ अक्सर यह होता है कि पर्दे में छेद है, और खुले पर्दे से कोई भी चीज बीच के कान तक पहुँच सकती है। कान को सूखा रखें, नहाते समय पानी जाने से बचाएँ और जाँच कराएँ।
क्या शुगर की जाँच के लिए खाली पेट आना जरूरी है?
जरूरी नहीं है, शिविर में रैंडम ब्लड शुगर की जाँच की जा सकती है। हालाँकि खाली पेट आने पर परिणाम की व्याख्या अधिक स्पष्ट होती है, इसलिए संभव हो तो खाली पेट आना बेहतर है।
क्या आसपास के जिलों से आने वाले लोग भी शिविर में शामिल हो सकते हैं?
हाँ। शिविर वाराणसी में आयोजित है, लेकिन इसमें चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, भदोही, मिर्जापुर और आसपास के अन्य क्षेत्रों से आने वाले लोग भी भाग ले सकते हैं। किसी प्रकार की क्षेत्रीय बाध्यता नहीं है।
निष्कर्ष
सुनने की कमी और मधुमेह, दोनों ऐसी समस्याएँ हैं जो धीरे धीरे बढ़ती हैं और शुरुआत में कोई तकलीफ नहीं देतीं। यही कारण है कि इनकी पहचान अक्सर देर से होती है। 27 सितंबर का यह शिविर उन परिवारों के लिए है जो जाँच को टालते आ रहे हैं, चाहे वह खर्च के कारण हो या समय की कमी के कारण।
यदि आपके घर में किसी बच्चे के बोलने में देरी हो रही है, किसी बुजुर्ग को कम सुनाई देता है, या किसी का कान लंबे समय से बह रहा है, तो इस रविवार को एक बार जाँच अवश्य करा लें। पंजीकरण के लिए 8765848001 पर कॉल करें या ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक करें। अस्पताल का पता और दिशा जानने के लिए संपर्क पृष्ठ देखें।
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By Satkriti Hospital
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